पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध | paryavaran pradushan par essay
प्रदूषण की समस्या को रोकने के उपाय
पर्यावरण प्रदूषण की रूपरेखा -
प्रस्तावना— पर्यावरण प्रदूषण एक सार्वजनिक गंभीर समस्या है और उसके साथ-साथ मानव समाज के जीवन मरण का महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़ गया है यदि समय रहते इसको दूर करने के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए तो आने वाले कुछ ही वर्षों में विश्व से युक्त वातावरण से मानव जाति सर्वदा के लिए नष्ट हो जाएंगे आज बढ़ती हुई भौतिकवादी विचारधारा के कारण मनुष्य मुख सुविधा के संधान में अधिक से अधिक वृद्धि चाहता है और इसके लिए वह प्राकृतिक संपदाओं का दोहन कर रहा है इस विचारहीनता के कारण परिणाम ही प्रदूषण की बड़ी समस्या है।
प्रदूषण की परिभाषा— सामान्य तौर पर देखा जाए तो वे समस्त कारण जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष के रूप में मानव के स्वास्थ्य तथा संसाधनों को हानि पहुंचाते हैं प्रदूषण के कारण जल ,वायु व भूमि के भौतिक ,रासायनिक या जैविक गुणों में होने वाला कोई भी परिवर्तन प्रदूषण है जिससे मनुष्य या उसके लिए लाभदायक क्रियाओं की हानि अवश्य होती है।
प्रदूषण के कारण— बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण प्रदूषण भी बढ़ रहा है उद्योग हेतु नए कारखाने आदि खोलने की क्रिया से कारखाने की संख्या में वृद्धि हो रही है इन कारखानों के कारण वायुमंडल में धुंआ छा रहा है वातावरण में व्याप्त हानिकारक तत्व सदैव हमारे स्वास्थ्य को नुकसान करता है उत्पादन करने वाले कारखाने दिन-रात लगातार विषैला धुएं छोड़ रहे हैं साथ ही रेल गाड़ियों आदि वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण वातावरण प्रदूषण होता रहता है 24 घंटे में शायद ही कोई भी क्षण ऐसा नहीं है जिसमें हम शुद्ध वायु में सांस ले सकते तत्पश्चात यही नहीं की प्रदूषण की मुख्य कारण आधुनिक औद्योगिकरण है|
वायु प्रदूषण— वायु प्रदूषण कारखानों से निकलने वाले धुएं और हलवाइयों की भट्ठियां, दिन रात ईंधन चलने वाले तेज वाहन आदि से 24 घंटे निकलने वाले धुएं और इसके साथ निकलने वाले विषैले तत्व वायुमंडल को प्रदूषित करता है विभिन्न प्रकार के ईंधन में दहन के कारण अनके विषैली गैस जैसे— कार्बन मोनोऑक्साइड वह सल्फर डाइऑक्साइड आदि के कारण वायुमंडल प्रदूषित हो रहा है यह गैस हमारे शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक है यह गैस हमारे फेफड़ों में पहुंचकर घातक अम्ल का निर्माण कर देती है और कारखाने में उत्पन्न धुएं के कारण हमारे नगरों में दूषित वातावरण बन जाता है इसके अलावा इन सभी कारखाने में से गैस निकलने वाले बहुत ही विषैली होती हैं और इससे डर बना रहता है भारत में ही अनेकों प्रकार के गैस निकालने के कारण 2 दिसंबर सन 1984 को भोपाल में होने वाले गैस से निकलने वाली दुर्घटना से जनधन की कितनी हानि हुई है यह सब जानते हुए भी परिणाम स्वरुप विश्व के वायुमंडल में रेडियो धार्मिकता फैल रही है इसके फल स्वरुप अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव जन्म लेते हैं जो रोग फैलने में जरा सा भी देरी नहीं लगती है इस गैस से हजारों मनुष्य व पशु - पक्षी मरते हैं तथा वनस्पति तक का जीवन भी नष्ट हो जाता है।
जल प्रदूषण— जल प्रदूषण के कारण परंपरागत और आधुनिक दोनों है जो व्यर्थ और ढोया हुआ मल, नगरों का गंदा पानी आदि नदियों और नालों में से होकर नदियों में जा रहा है और इन नदियों का यही पानी पीने के काम में आता है इन गंदे पानी को पीने के बाद में हमारे शरीर में बहुत अलग-अलग प्रकार के रोग होते हैं जो की हैजा, पेचिश,पीलिया आदि जैसे रोग जल प्रदूषण के कारण ही होते हैं इन सब में आधुनिक कर्म के मुख्य कारण यह होते हैं कि उद्योग धंधे इनका दूषित जल अपने साथ गंदगी के अलावा अनेक रासायनिक पदार्थ को भी ले जाता है यह दूषित जल मनुष्य पशुओं और वनस्पतियों सभी के लिए हानिकारक है जब यह दूषित जल खेती में काम में लाया जाता है तो इससे मिट्टी में से पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
रासायनिक प्रदूषण— हमारे खेत में होने वाले कीटनाशक दवा आदि के कारण रासायनिक पदार्थ का प्रयोग भूमि की उपजाऊ शक्ति को काम करता है तथा खाद्य पदार्थ के अनेक हनी आवश्यक तत्वों का समावेश कर देता है इसे सरल शब्दों में कहा जाए तो हमारी भूमि की उपजाऊ को नष्ट कर देता है।
ध्वनि प्रदूषण— उद्योग और मशीनी करण के फल स्वरुप हमारे प्रत्येक क्षण शोर और जीवन यापन करना पड़ता है होने वाले ध्वनि के कारण हमें अच्छे से नींद ना आने का रोग उत्पन्न हो जाता है।
प्रदूषण रोकने के उपाय— वायु प्रदूषण को रोकने के लिए चिमनियों में हमें इस तरह के फिल्टर लगाए जाने चाहिए जो कि प्रदूषण तत्वों को वायुमंडल में पहुंचने ही ना दे जल प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक है कि जल प्रदूषण के स्रोतों के स्थल पर गंदे पानी को ना डाला जाए उद्योग धंधों से गंदे पानी को भूमिगत किया जाना चाहिए । रेडियो धार्मि प्रदूषण को रोकने का एकमात्र उपाय यही है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संघ द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जाए। रासायनिक प्रदूषण को रोकने का सहज उपाय यही है कि इस प्रकार के पदार्थ को किसी स्थान पर एकत्र न होने दिया जाए और उन्हें जल्दी से जल्दी भूमिगत कर दिया जाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए वनों का आरक्षण तथा वन रोपण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है क्योंकि वृक्ष वातावरण को आक्सीजन प्रदान करता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर लेते हैं वृक्ष पर्यावरण संतुलन के सर्वोत्तम साधन एवं कारक है अधिक से अधिक वृक्षारोपण करके हम वायु प्रदूषण से होने वाली हानियों से बच सकते हैं।
उपसंहार— प्रदूषण की समस्या मानव है और विज्ञान ने उसमें वृद्धि की है यह मानव को मौत के मुंह से धकेलने की चेष्टा है यह प्राणियों के अमंगल की कामना है जीवन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रदूषण पर नियंत्रण किया जाना आवश्यक है इसकी अपेक्षा से मानव का जीवन आसान हो सकता है और पर्यावरण प्रदूषण के उपाय का सामूहिक उत्तरदायित्व है प्रत्येक नागरिक को चाहिए कि वह पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में अपना योगदान दे ताकि मानव जीवन आसन हो सके।
FAQ; पर्यावरण प्रदूषण के बारे में संक्षिप्त प्रश्न और उत्तर:
1. पर्यावरण प्रदूषण क्या है? पर्यावरण प्रदूषण एक प्रकार की स्थिति है जिसमें पर्यावरण के घातक या विकर्षक प्रभाव मनुष्य और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होते हैं।
2. प्रदूषण के क्या प्रकार होते हैं? वायु, जल, ध्वनि, जलवायु, प्लास्टिक, और उपकरण प्रदूषण जैसे विभिन्न प्रकार के प्रदूषण होते हैं।
3. वायु प्रदूषण क्या है? वायु प्रदूषण उच्च मात्रा में वायुमंडल में विषाणु, धूल, केमिकल और अन्य जैसे घातक तत्वों के कारण होता है।
4. जल प्रदूषण क्या है? जल प्रदूषण जल स्रोतों में जैविक और अजैविक पदार्थों के आपसी मिलन के कारण होता है, जिससे पानी की गुणवत्ता कम होती है।
5. प्लास्टिक प्रदूषण क्यों हानिकारक है? प्लास्टिक प्रदूषण मनुष्यों और वनस्पतियों के लिए हानिकारक होता है, क्योंकि प्लास्टिक कई सालों तक टूटता नहीं है और पर्यावरण में बुरी तरीके से प्रभाव डालता है।
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