उपयोगिता का अर्थ|उपयोगिता क्या है |upyogita kya hai in Hindi
किसी भी मानव की इच्छा से उत्पन्न होने वाले आवश्यकताओं को उपयोगिता कहते है। उदाहरण के तौर पर कपड़ा मनुष्य को तन ढकने की आवश्यकता को पूर्ति करता है उसे उपयोगिता कहां जाता है यह माननीय तथा एक मनोवैज्ञानिक धारणा है व्यक्ति की भिन्न-भिन्न स्थानों में वह समय अनुसार उपयोगिता बदलती ही रहती है इसके अतिरिक्त उपयोगिता का लाभदायक ,अलाभदायक , अच्छाई या बुराई आदि से कोई संबंध नहीं है।"
उपयोगिता की परिभाषा |upyogita ki paribhasha
प्रो. थामस — के अनुसार जब तक कोई वस्तु मनुष्य के मस्तिक से यह शरीर की कोई आवश्यकता पूरी करती है उसे आर्थिक दृष्टिकोण से उपयोगिता कहते हैं चाहे वह आवश्यकताओं की पूर्ति का प्रभाव अन्य व्यक्तियों पर भयानक तरीके से हो चाहे उसे सारे समाज का कितना अहित हो।"
प्रो. एडवर्ड नेवीन — के अनुसार अर्थशास्त्र में उपयोगिता का एक संतोष या आनंद या लाभ का होता है जिससे कि वह व्यक्ति को धन की आवश्यकता या संपत्ति के उपयोगिता से प्राप्त होता है।
श्रीमती जॉन रॉबिंसन के अनुसार उपयोगिता वस्तुओं का वह गुण है जिसके फलस्वरूप लोगों को उसे खरीदना है पड़ता है जिससे कि उन्हें संतुष्टि भी प्राप्त होती है।"
इस प्रकार उपयुक्त भाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि उपयोगिता से आशय किसी भी वस्तु या सेवाओं से उस अमूर्त गुण से हैं जो हमारे अवसरों को संतुष्ट कर सकते हैं।"
उपयोगिता के लक्षण |उपयोगिता की विशेषताएं (upyogita kya hai iski visheshta bataiye)
किसी वस्तु के प्रयोग से संतोष होना ऐसे ही आज शास्त्र में उपयोगिता कहते हैं इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं—
1. उपयोगिता वस्तु का आंतरिक गुण नहीं है—
उपयोगिता वस्तु कि वह बाह्य गुण है आवश्यकताओं के कारण उस व्यक्ति से प्राप्त होती है जो एक भूखे प्यासे व्यक्ति के लिए भोजन तथा जल की आवश्यकता होती है किंतु भोजन करने तथा पानी पीने के बाद उस वस्तु से तत्काल ही कोई संतुष्ट नहीं मिल पाती है इस तरह यह कहा जाता है कि उपयोगिता वस्तु का आंतरिक गुण है।"
2. उपयोगिता व्यक्तिगत होती है— वस्तु से प्राप्त होने वाले संतुष्टि या उपयोगिता वस्तु में निहित नहीं होती है अपितु व्यक्ति विशेष में निहित होती है यह मनुष्य के स्वाभाव आदत तथा अन्य परिस्थितियों पर निर्भर होती है।"
3. उपयोगिता सापेक्षिक होती है— दो या अधिक पदों से प्राप्त होने वाली उपयोगिता जहां पृथक होती है वहां दो पक्षों को प्राप्त होने वाली उपयोगिता का गणना तथा उसके परस्पर तुलना की जाती है उदाहरण के तौर पर एक विद्यार्थी जो अर्थशास्त्र की पुस्तक से पढ़ाई करता है उसके लिए पुस्तक की उपयोगिता अधिक होती है किंतु दूसरे विद्यार्थी जो उत्तर पुस्तिका पर प्रश्न उत्तर तैयार अर्थशास्त्र अध्ययन करता है उसे अर्थशास्त्र की उपयोगिता कम होगी।"
4. उपयोगिता वस्तु तथा उपभोक्ता के मध्य परस्पर संबंध पर निर्भर होती है— वस्तु तथा उपभोक्ता के मध्य संबंध ना होने की दशा में उस वस्तु से कोई संतुष्ट प्राप्त नहीं होता है जैसे कि विद्यार्थी के लिए पुस्तक की उपयोगिता होती है किंतु ठीक उसी प्रकार अध्ययन काल के बाद पुस्तक कि कोई उपयोगिता नहीं रह जाती है।"
5. उपयोगिता लाभदायक अथवा हानिकारक भी होती है— वस्तु से प्राप्त होने वाली उपयोगिता उपभोक्ता के लिए सदैव लाभदायक हो ऐसा नहीं है क्योंकि हानिकारक वस्तु में भी उपयोगिता होती है प्रो टॉमस के अनुसार चाहे किसी भी वस्तु के उपयोग या उपभोक्ता पर बुरा प्रभाव पड़े चाहे इसके उपभोग से समाज का अहित हो किंतु यदि वह वस्तु किसी उपभोक्ता के मस्तिक से अथवा शरीर की किसी भी आवश्यकता की पूर्ति कर सकती है तब इसमें उपभोक्ता मानी जाती है।"

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