प्रवर्तक क्या है ? कार्य, अधिकार

 प्रवर्तक क्या है|प्रवर्तक का अर्थ 

प्रवर्तक का आशय ऐसे व्यक्तियों से होता है जो Company के निर्माण संबंधी विचार अपने मस्तिष्क में लाकर एक नए योजना के अनुसार कंपनी का निर्माण करते हैं। वे प्रवर्तक जो व्यापार संबंधित योजना बनाकर किसी निश्चित Companyका निर्माण करते हैं उससे प्रवर्तक कहते हैं।"

प्रवर्तक के कार्य (pravartak ke karya)

प्रवर्तक के कार्य निम्न है—

1. निर्माण व संभावना को देखना—Company के निर्माण को विचार करके उसकी विचारधारा को पूर्ण करने का प्रयास करना।


2. योग्य व्यक्तियों का चयन—संचालकों की नियुक्ति करने के लिए योग्य व्यक्तियों का चयन करना।


3. पार्षद सीमा नियम एवं अंतर नियम तैयार करना— Company के लिए पार्षद सीमा नियम एवं अंतर नियम तैयार करना।


4. सम्मेलन प्रमाण पत्र प्राप्त करना— एक Company के लिए रजिस्टर करके उसकी प्रमाण पत्र को प्राप्त करना।


5. बैंक निर्देशक एवं सलाहकार की नियुक्ति करना—प्रवर्तक द्वारा कंपनी के लिए बैंकों को निर्धारित करने का कार्य किया जाता है और साथ ही Company के लिए निर्देशक एवं वैधानिक सलाहकार की नियुक्ति की जाती है।


6. प्रविवारण की व्यवस्था करना—प्रविवरण को बनाकर रजिस्टर के यहां भेज कर उसके विज्ञापन की समुचित व्यवस्था करना। 


7. प्रारंभिक व्ययो का भुगतान करना—प्रारंभिक व्ययो का भुगतान करने की व्यवस्था करना।


प्रवर्तक के अधिकार (pravartak ke Adhikar)

1. प्रारंभिक व्यय लेने का अधिकार— प्रवर्तक को यह अधिकार है कि Company के निर्माण एवं उसे चलाने में जो आवश्यक व्यय किया जाता है उससे Company से वसूल कर लेते हैं परंतु व्यय को वसूल करने के लिए उन्हें आवश्यक प्रमाण पेश करना पड़ता है परंतु यह समस्त अंतर नियम के अनुरूप आवश्यक होना चाहिए।

2. प्रवर्तक से अनुपात राशि प्राप्त करने का अधिकार— किसी Company के विवरण के फलस्वरूप प्रवर्तक में से किसी एक प्रवर्तक द्वारा लाभ अर्जित कर ले तो वह प्रवर्तक अन्य प्रवर्तक से अनुपात राशि वसूल कर सकता है।


3. परिश्रमिक पाने का अधिकार— प्रवर्तक Company के निर्माण करने एवं संचालित करने में कठिन परिश्रम करते हैं अतः कंपनियां इन्हें प्रतिफल के रूप में परिश्रमिक देती है प्रवर्तक कंपनी में निम्न रूपों में परिश्रमिक प्राप्त कर सकता है (1) लाभ (2) परिश्रमिक (3) कमीशन ( 4)राशि




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