कीमत यंत्र का अर्थ |Meaning of Price Machine
एक स्वतंत्रता उधम अर्थव्यवस्था या पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में आधारभूत आर्थिक समस्याओं का समाधान कीमत संयंत्र की सहायता से किया जाता है। कीमत संयत्र का आशय यह है कि सभी वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमत बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप में मांग की पूर्ति द्वारा पूर्ण निर्धारित हो जाती है किसी निश्चित समय में किसी वस्तु के विक्रय अपने हित को ध्यान में रखते हुए अधिक कीमत पर वस्तु की अधिक मात्रा को बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं जबकि क्रेता एवं उपभोक्ता श्वहित को ध्यान में रखते हुए कीमत की निर्धारण कीमत संयंत्र द्वारा होता है। वस्तु या सेवा कि वह कीमत निर्धारण होती है जिस पर वस्तु की मांग तथा पूर्ति बराबर होती है।
कीमत यंत्र से आशय उस बाजार शक्तियों की क्रय क्षमता से है जो अर्थव्यवस्था में संतुलन स्थापित करती है हम दूसरे शब्दों में देख सकते हैं कि कीमत यंत्र आर्थिक संगठन की एक ऐसी पद्धति से है जिसके द्वारा बाजार अर्थव्यवस्था में संसाधनों केआवंटन तथा उत्पादन के वितरण संबंधित निर्णय लिए जाते हैं
फग्रयुसन के अनुसार कीमत संयत्र से आशय विभिन्न बाजारों में मांग और पूर्ति की अंतर क्रिया द्वारा वस्तुओं सेवाओं एवं संसाधनों की कीमत निर्धारण करना है कीमत वह राशि है जो कि वस्तु या साधन के निश्चित मात्रा एवं गुणवत्ता को प्राप्त करने के लिए दी जाती है।
कीमत यंत्र की परिभाषा|Definition of Utility
टी .जे. बी.हाफ के अनुसार कीमत यन्श्र आर्केस्ट्रा का अदृश्य संचालक है
के.के .गुप्ता के अनुसार की मात्रा से तात्पर्य ऐसे बाजार नियंत्रण है जिसके द्वारा सभी वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमत बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप में मांग एवं पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है इस प्रकार उपयुक्त विवेचना के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि कीमत संयत्र बाजार में मांग और पूर्ति की शक्तियों से संबंधित संयत्र है यह अर्थव्यवस्था में मांग एवं पूर्ति की शक्तियों को कार्य करने के सफलता वह स्वतंत्रता होती है केवल वे ही वस्तु उत्पादित की जाएगी जिनकी संक्षेप कीमत संक्षेप कीमत अधिक होने की प्रक्रिया के कारण उत्पादकों को मिलने वाले लाभ अधिक होने की संभावना बढ़ जाती है इसी प्रकार उत्पादन कि उन्हें साधनों को अधिक रोजगार प्राप्त होगा जिसके तुलनात्मक कीमत कम होने के कारण उत्पादकों को न्यूनतम लागत खर्च करनी पड़ेगी।
कीमत यंत्र की मूलभूत विशेषताएं
कीमत यंत्र की मूलभूत विशेषताएं निम्न प्रकार की हैं
1. सामूहिक परिणाम — कीमतों के एक समूह को कीमत यंत्र की कीमत प्रणाली भी कहते हैं कीमत यंत्र द्वारा जिस कीमत का निर्धारण होता है उसे बाजार कीमत कहते हैं यदि बाजार कीमत अनेक करता हूं तथा विक्रेताओं के परस्पर स्वतंत्रता निर्णय एवं विक्रेताओं का समूह परिणाम होती है कोई भी अकेला क्रेता और विक्रेता बाजार की प्रचलित कीमतों को प्रभावित नहीं कर सकता है।
3. स्वतंत्रता आर्थिक निर्णय से संचालित— कीमत प्रणाली व्यक्तियों के स्वतंत्रता आर्थिक निर्णयों से स्वचालित रखती है। निर्णयों में समस्या के लिए किसी केंद्रीय अधिकारी की आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि परिणाम निर्णय हो तो यह स्वयं करते हैं।
4. आवंटन कार्य— कीमत प्रणाली आर्थिक संगठन में मांग और पूर्ति की सापेक्षिक शक्तियों में परिवर्तन के द्वारा वस्तुओं और संगठनों में आवंटन का कार्य करते हैं। जिस वस्तु की मांग घटती है उनकी कीमत गिरती है और पूर्ति घटाने की कीमत बढ़ती है जबकि पूर्व दीपक शरीर में फुर्ती कीमत वाले क्षेत्र से हटकर अधिक कीमत वाले क्षेत्र में होते हैं।
5. सफल संचालन— कीमत प्रणाली के सफल संचालन के लिए आवश्यक है कि आज व्यवस्था में पूर्ति प्रतियोगिता बापू रोजगार हो, कदमों में पूर्ण गतिशीलता हो, उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं पर कोई नियंत्रण ना हो, साधनों पर नीचे स्वामित्व हो तथा, बाजार का पूर्ण ज्ञान हो,
कीमत यंत्र की समस्याएं
कीमत यंत्र से हमें यह पता चलता है कि व्यवसाय जीवन में कीमत यंत्र के द्वारा आर्थिक क्रियाओं का संचालन करने में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और वे सभी उद्देश्य प्राप्त नहीं कर पाते हैं जिनके लिए इसका उपयोग करने की सलाह दी जाती है संक्षेप में कीमत यंत्र की मुख्य सीमाएं इस प्रकार है—
1. अपूर्ण प्रतियोगिता— कीमत यंत्र के सफल संचालन के लिए यह आवश्यक है कि अर्थव्यवस्था में पूर्ण प्रतियोगिता विद्यमान हो परंतु वास्तविक जीवन में अपूर्ण प्रतियोगिता और एकाधिकार ही क्रियाशील रहती है कीमत यंत्र सफलतापूर्वक कार्य नहीं कर पाता और साधनों का आवंटन भी विवेक पूर्ण नहीं हो पाता है।
2. पूर्ण रोजगार— कीमत यंत्र की यह भी मान्यता होती है की आवास्तविक अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार की स्थिति है जबकि व्यवहार में यह देखा जाता है कि अन्य साधन बेरोजगारों यह अर्थ बेरोजगारों रहते हैं स्वतंत्रता कीमत प्रणाली में मानवीय तथा भौतिक साधनों का पूर्ण एवं उचित उपयोग नहीं हो पाता है।
3. साधनों में गतिशीलता का अभाव— कीमत यंत्र मांग एवं पूर्ति के संतुलन में साधनों में गतिशीलता मानकर चलती है जबकि व्यवहार में साधनों से पर्याप्त गतिशीलता का अभाव दृष्टिकोण होता है।
4. आर्थिक स्वतंत्रता एवं उपभोक्ताओं की सार्वभौमिकता का अभाव— आर्थिक स्वतंत्रता एवं उपभोक्ता के सर्वभौमिक के अभाव के कारण कीमत प्रणाली सिद्धांत होती है क्योंकि व्यवहारिक जीवन में सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप से आर्थिक स्वतंत्रता का अभाव हो जाता है तथा उपभोक्ता केसर भक्ता की साधनों के अभाव अज्ञात राम बाह्य प्रभावों के कारण कोरी कल्पनाएं हैं।
5. व्यापार चक्र का जन्म— कीमत यंत्र व्यवस्था में व्यापार चक्र को जन्म दिया जाता है तेजी और मंदी की स्थिति आर्थिक साधनों के आप व्यय एवं दुरुपयोग को जन्म दिया जाता है आर्थिक मंदी और युद्धत्तरकालीन तेजी दोनों इस साधनों के आवंटन को दोष पूर्ण बना देता है।
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